कबीर दास के 5 ऐसे अनमोल दोहे जो जीवन बदल देंगे (अर्थ सहित)

आज की भागदौड़ भरी दुनिया में, जहाँ मनुष्य तनाव, लालच और अहंकार में उलझा हुआ है, कबीर दास के दोहे हमें आत्मचिंतन और सादगी का महत्व समझाते हैं। इस लेख में हम कबीर दास के 5 ऐसे अनमोल दोहे प्रस्तुत कर रहे हैं, जो सच में जीवन को बदल देने की शक्ति रखते हैं।

कबीर दास के 5 ऐसे अनमोल दोहे

Table of Contents

“कबीर दास के 5 ऐसे अनमोल दोहे”

 

१.  बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय

अर्थ:

जब मैं इस दुनिया में बुराई ढूंढने निकला, तो मुझे कोई बुरा व्यक्ति नहीं मिला। लेकिन जब मैंने अपने दिल में झाँककर देखा, तो पाया कि मुझसे बड़ा बुरा कोई नहीं है।

जीवन संदेश:

यह दोहा हमें सिखाता है कि दूसरों में दोष निकालने से पहले हमें अपने अंदर झाँकना चाहिए। अक्सर हम अपनी गलतियों को नजरअंदाज कर दूसरों को दोषी ठहराते हैं। आत्मचिंतन ही सच्चे सुधार का पहला कदम है।

२. काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब।।

अर्थ:

जो काम कल करना है, उसे आज कर लो। और जो आज करना है, उसे अभी कर लो। क्योंकि अगले पल क्या होगा, इसका कोई भरोसा नहीं।

जीवन संदेश:

यह दोहा समय की कीमत समझाता है। जीवन अनिश्चित है, इसलिए आलस्य छोड़कर समय का सदुपयोग करना चाहिए। जो व्यक्ति आज का काम कल पर छोड़ता है, वह सफलता से दूर रह जाता है।

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कबीर दास के 5 ऐसे अनमोल दोहे

“कबीर दास के 5 ऐसे अनमोल दोहे जो जीवन बदल देंगे”

३.  माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका छोड़ दे, मन का मनका फेर

अर्थ:

सदियों से लोग हाथ में माला घुमा रहे हैं, लेकिन उनके मन का विकार नहीं बदला। हाथ की माला छोड़कर मन की माला फेरनी चाहिए।

जीवन संदेश:

कबीर दास जी कहते हैं कि केवल बाहरी पूजा से कुछ नहीं होता। सच्ची भक्ति वही है जिसमें मन शुद्ध हो। जब तक मन में अहंकार, क्रोध और लालच है, तब तक ईश्वर की सच्ची प्राप्ति संभव नहीं।

४.  दुःख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय।

अर्थ:

दुख आने पर हर कोई भगवान को याद करता है, लेकिन सुख में कोई नहीं करता। यदि हम सुख में भी ईश्वर का स्मरण करें, तो दुख आने की नौबत ही क्यों आए।

जीवन संदेश:

यह दोहा हमें निरंतर ईश्वर से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। केवल संकट के समय भगवान को याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुख-दुख दोनों में समान भाव रखना ही सच्ची भक्ति है।

५.  साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।

अर्थ:

सच्चा साधु वही है जो सूप की तरह हो — जो अच्छे और सार तत्व को ग्रहण करे और व्यर्थ बातों को छोड़ दे।

जीवन संदेश:

यह दोहा विवेक की शिक्षा देता है। जीवन में हमें हर बात स्वीकार नहीं करनी चाहिए। जो उपयोगी और सत्य है, वही अपनाना चाहिए और नकारात्मकता को छोड़ देना चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion)

कबीर दास के दोहे केवल कविता नहीं हैं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। इनके शब्द सरल हैं, लेकिन अर्थ बहुत गहरे हैं। यदि हम इन दोहों को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि जीवन में उतारें, तो हमारा दृष्टिकोण, सोच और व्यवहार सब बदल सकता है।

आज के समय में कबीर दास के दोहे हमें सिखाते हैं कि सच्चा धर्म दिखावा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि है। यही कारण है कि सदियों बाद भी कबीर दास जी के दोहे लोगों के दिलों को छूते हैं और जीवन को सही दिशा देते हैं।

कबीर साहेब के ५ दोहे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. कबीर दास के दोहे क्यों प्रसिद्ध हैं?

कबीर दास के दोहे इसलिए प्रसिद्ध हैं क्योंकि वे सरल शब्दों में जीवन का गहरा सत्य बताते हैं। इनके दोहे अहंकार, लालच, आडंबर और अज्ञान को दूर कर इंसान को आत्मचिंतन की राह दिखाते हैं।

2. कबीर दास के दोहों का मुख्य संदेश क्या है?

कबीर दास के दोहों का मुख्य संदेश है –
सत्य, आत्मज्ञान, सादगी और ईश्वर से सीधा संबंध
वे दिखावे की पूजा के बजाय मन की शुद्धता पर जोर देते हैं।

3. क्या कबीर दास के दोहे आज के समय में भी प्रासंगिक हैं?

हाँ, कबीर दास के दोहे आज के समय में और भी ज्यादा प्रासंगिक हैं। आज की भागदौड़, तनाव और अहंकार से भरी जिंदगी में उनके दोहे हमें सही दिशा और मानसिक शांति देते हैं।

4. कबीर दास के दोहे अहंकार को कैसे तोड़ते हैं?

कबीर दास के दोहे हमें यह एहसास कराते हैं कि अहंकार ही सबसे बड़ा दोष है। वे सिखाते हैं कि जब तक इंसान अपने अंदर की बुराइयों को नहीं पहचानता, तब तक सच्चा सुधार संभव नहीं।

5. क्या कबीर दास के दोहे केवल धार्मिक लोगों के लिए हैं?

नहीं, कबीर दास के दोहे हर इंसान के लिए हैं। ये केवल धर्म तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीवन, समाज और मानव व्यवहार को सुधारने का मार्ग दिखाते हैं।

6. कबीर दास के दोहे पढ़ने से जीवन में क्या बदलाव आता है?

कबीर दास के दोहे पढ़ने और समझने से:

  • सोच सकारात्मक होती है

  • अहंकार और क्रोध कम होता है

  • आत्मविश्वास और शांति बढ़ती है

 

7. क्या कबीर दास के दोहे याद करना लाभदायक है?

हाँ, कबीर दास के दोहे याद करना बहुत लाभदायक है। ये कठिन समय में मार्गदर्शन, धैर्य और आत्मबल प्रदान करते हैं।

8. कबीर दास के दोहे किस भाषा में लिखे गए हैं?

कबीर दास के दोहे मुख्य रूप से साधुक्कड़ी, अवधी और ब्रज मिश्रित भाषा में लिखे गए हैं, ताकि आम व्यक्ति भी उन्हें आसानी से समझ सके।

 

 

 

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