Gyan Guddadi Sandhya Path | ज्ञान गुदड़ी पाठ 01
<ज्ञान गुदड़ी संध्या पाठ> Gyan Guddadi प्रारम्भ धर्मदास बिनवे कर जोरी, साहेब सुनिये बिनती मोरी काया गुदड़ी कहो सन्देशा, जासे जिव का मिटे अंदेशा || अलख पुरुष जब किया विचारा, लख चौरासी धारा डारा । पाँच तत्त्व की, गुदड़ी बीनी, तीन गुनन से ठाढ़ी कीनी ॥ तामें जीव ब्रह्म और माया, सम्रथ ऐसा … Read more