सत्य कबीर , Satya Kabir
अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बन्दीछोर कहाय। सो तो पुरुष कबीर है , जननी जना न माय ॥ साहिब पुरुष कबीर ने,देह धरी नहि कोय । शब्द स्वरुपी रूप है, घट -घट बोलै सोय ॥ सेवक होकर उत्तरे ,इस पृथ्वी के माहि। जीव उधारन जगत गुरू, बार-बार बलि जाहि॥ सत्य कबीर शब्द स्वरुपी रूप है, दादा भाई … Read more